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बचपन की नादानी

वन्शिनी तोल्पड़ी कक्षा ८ वी G

बचपन में बच्चों द्वारा कई छोटी-छोटी नादानियाँ हो जाती हैं | परन्तु कभी-कभी इनकी शैतानियाँ बहुत भयानक रूप ले लेती हैं | बचपन में हम बहुत नादान होते हैं और इन गलतियों को बिलकुल भी महत्त्व नहीं देते | अगर कोई इन गलतियों के लिए बच्चों को डांटता है या उनको राय देता है की उन गलतियों को दुबारा न दोहराएँ तो बच्चे बुरा मान जाते हैं | वे डांटने या राय देने वाले को मूर्ख भी समझ बैठते हैं |

पढाई के अलावा हमें अपने शौक पर नियमित रूप से ध्यान देना चाहिए | गाना गाना, चित्रकारी करना या फिर अन्य कोई शौक | ये हमारे जीवन में संतुलन और शान्ति लाते है | हम में समझदारी बढती है | हम गलतियाँ कम करते हैं | जीवन में सफल होने के लिए हमें अपनी बचपन की नादानियों को सुधारकर उनसे सीख लेनी चाहिए |

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