Author: Sovira Lal, Class X D
हमेशा मैं ही लिखती रही, कभी किसी की लिखी नहीं गई।
पर अब ये समझ आया है कि शायद सबसे ख़ूबसूरत लोग वही होते हैं,
जो जीने नहीं, महसूस करने आए होते हैं।
मैं हर मुस्कुराहट में एक कहानी देखती हूँ,
हर आँसू में एक शेर,
हर ख़ामोशी में एक जज़्बा।
मेरे लिए ज़िंदगी सिर्फ़ गुज़रना नहीं,
बल्कि हर पल को लफ़्ज़ों में बसाना है
एक नया लफ़्ज़, एक नया एहसास।
मैं शायरी नहीं लिखती,
क्योंकि मैं उन लम्हों की शायरा हूँ
जो दुनिया देख तो लेती है,
पर महसूस नहीं करती।
मैं शायरा हूँ, और यही मेरी दास्तान है।