Author: Samaira Pachauri, Class IX E
जन्म से पहले माँ से उसने, युद्ध का हर ज्ञान लिया,
छोटी उम्र में ही उसने, बड़ा लक्ष्य पहचान लिया।
पिता जैसा ही तेज था उसमें, और कृष्ण का वो लाड़ला था,
पूरे पांडव कुल की आँखों का, वो प्यारा सा उजाला था।
अधर्म के चक्रव्यूह में जब, महारथी सब हार गए, अकेला वो बालक घुसा, जिसे देखकर दुश्मन दंग रह गए।
छह द्वारों को तोड़ दिया, जैसे बिजली कड़की हो,
अकेला लड़ गया वो सबसे, जैसे कोई ज्वाला भड़की हो।
सात योद्धाओं ने मिलकर, जब छल से उस पर वार किया,
पहिया उठाकर हाथ में उसने, मृत्यु का भी सत्कार किया।
किशोरावस्था में होकर उसने, इतिहास नया लिख डाला था,
वह वीर अभिमन्यु, धर्म का रखवाला था।