Author: Aayam Bhandari, Class VI D
कुछ भाव शब्दों से आगे जाएँ,
कुछ मौन स्वयं ही गुनगुनाएँ,
जब अर्थ हृदय में आकार लें,
तब भाव कविता बन जाएँ।
जीवन केवल क्षणों की गिनती नहीं,
यह अनुभवों का विस्तार है,
हर सुख-दुख, हर सीख मिलकर,
गढ़ते एक नया आयाम हैं।
जो साथ चले बिना स्वार्थ कहे,
जो दृष्टि पढ़ ले, बोले न होंठ,
वह मित्र नहीं, वह सोच बने,
और दे जीवन को नया जोश।
हँसी ने सिखाया हल्का होना,
पीड़ा ने दी पहचान नई,
इन दोनों के मेल से ही तो,
मेरी चेतना को मिली आयाम की सही लकीर वही।
यह रचना केवल मित्रता नहीं,
यह जीवन का परिधान है,
जहाँ भाव, विचार और विश्वास,
तुक में बँधकर बनते हैं — आयाम।