Author: Ritika Jain, Class IX G
रुकना नही तुम मेरे लिए, बस थोड़ी देर ठहर जाना।
रुकना नहीं तुम मेरे लिए, बस थोड़ा-सा ठहर जाना,
समय को भी थोड़ा समय देकर, फिर लौट आना।
जो तूफ़ान जीवन में आया था, उसे शांत करके जाना,
ज़िंदगी को भी एक आखरी मौक़ा देकर जाना।
रुकना नहीं तुम मेरे लिए, बस थोड़ा-सा ठहर जाना।
हर अँधेरे को रोशनी की तलाश है,
हर उजाले को तेरी ही आस है,
हर आँसू को मुस्कान की ही प्यास है।
कदम शायद भटक रहे होंगे अभी, मंज़िल शायद मिली नहीं होगी अभी,
पर हार को दिल से मत अपनाना, बस थोड़ा-सा ठहर जाना।
यह वक़्त है, तुम्हारी ज़िंदगी नहीं,
ये पल भी बीत जाएँगे यूही,
यादें सिमट कर किसी डिब्बे में
चुपचाप रह जाएँगी कहीं।
शायद कोई एक दिन, तुम्हारे दर्द की कहानी सुनना चाहेंगे सभी।
रुकना नहीं तुम मेरे लिए, बस थोड़ा-सा ठहर जाना।